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क़ुरान की फ़ज़ीलत (Superiority of Quran)

क़ुरान की फ़ज़ीलत (Superiority of Quran)

क़ुरान शरीफ अल्लाह का कलाम हैं हिदायत का सामान हैं,सिरते मुस्तकीम हैं, अल्लाह की रहमत हैं, इसकी रौशनी में इंसान अपनी ज़िन्दगी का मकसद समझता हैं इसके वसीले से बन्दा अपने रब से कलाम करता हैं यह रूह की ग़िज़ा और दिल की शिफा,अक्ल की रहनुमा, इल्म का खज़ाना, आँखों का नूर, दिन का चैन व सुरूर और चिरागे मंज़िल हैं।
इसकी बदौलत मोमिनो मुत्तकियो और अल्लाह के नेक बन्दों को खुदा की मुहब्बत नसीब होती हैं क़ुरान से बन्दा अपने रब के करीब होता हैं उसे रूहानी सुकून और अपनी ज़िन्दगी में मिठास नसीब होती हैं जिसे लफ्ज़ो में बयां नहीं किया जा सकता।
क़ुरान मजीद की तिलावत की बरकत से मोमिनो को इज़्ज़त, रहमते इलाही और कामयाबी नसीब होती हैं एक मोमिन बन्दा जब क़ुरान की आयतो को पढ़ता या सुनता हैं जिसमे अल्लाह पाक ने अपने बन्दों को तरह तरह की नेअमतें अता फरमाने का वादा फ़रमाया हैं तो उसकी रूह ख़ुशी के मारे झूम उठती हैं और जब उन आयतो को पढ़ता या सुनता हैं जिसमे उसने नाफ़रमानो को सज़ाये देने का बयां फ़रमाया हैं तो वह ख़ौफ़े इलाही से कांपने लगता हैं आँखों से आंसुओ की झड़ी लग जाती हैं।
घर चाहे जितना खूबसूरत और आबाद हो लेकिन अगर उसमे क़ुरान की तिलावत न होती हो तो वह घर अल्लाह की नज़र में खंडहर और वीरान घर कहलाता हैं।
अल्लाह के प्यारे रसूल हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम इसकी अहमियत बयान फरमाते हुए इरशाद फरमाते हैं जिसके दिल में क़ुरान का कोई हिस्सा नहीं मतलब जिसे क़ुरान की कोई भी सुरते आयते न याद हो वह उजड़े हुए घर की तरह हैं इसलिए क़ुरान की तालीम को आम फरमाने पर ज़ोर देते हुए प्यारे रसूल ने फ़रमाया हैं की सबसे अच्छा आदमी वह हैं जो क़ुरान शरीफ पढ़े और दुसरो को भी पढाये सिखाये।
अगर हम अल्लाह का करीबी बन्दा बनना चाहते हैं तो उसके लिए बेहतरीन सहारा व वसीला क़ुरान शरीफ हैं जो शख्स जितने अदब व खुलूस से क़ुरान शरीफ की तिलावत करता हैं वह उतनी देर तक अपने रब से बात करता हैं क़ुरान की तिलवात करने से रहमते नाज़िल होती हैं घर में हो रही परेशानी दूर हो जाती हैं मुश्किल से मुश्किल काम आसान हो जाते हैं अल्लाह तआलाह हमे क़ुरान मजीद की तिलवात की करने की तौफीक अता फरमाए आमीन।

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