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माँ बाप की नाफरमानी का अंजाम

माँ बाप की नाफरमानी का अंजाम

इस ज़माने में लड़के लड़कियां मां बाप के हुकूक से बिल्कुल गाफिल(बेपरवाह) है I उनकी ताज़ीम अदब खिदमत और फरमाबरदारी से मुंह मोड़े हुए हैं बल्कि कुछ तो इतने बदनसीब हो गए हैं कि मां बाप को बुरी तरह तकलीफ पहुंचा रहे हैं नतीजा यह है कि मां बाप की नाफरमानी करके खुदा के अज़ाब का शिकार और जहन्नम के हकदार बन रहे हैं I

एक आदमी ने पूछा, या रसूल अल्लाह माँ बाप का औलाद पर क्या हक़ हैं? (औलाद को मां बाप के साथ कैसा बर्ताव करना चाहिए) आपने फरमाया वह दोनों तुम्हारी जन्नत और दोज़ख है उन्हें खुश रखने में जन्नत और नाराज़ रखने में जहन्नम मिलेगी I

बहेकी शरीफ की हदीस हैं, जिस आदमी से उसके मां-बाप खुश होते हैं उनके लिए सुबह से ही जन्नत के दरवाजे खोल दिए जाते हैं एक आदमी ने पूछा या रसूल अल्लाह अगर मां-बाप ज़्यादती करें तो? आपने फरमाया अगरचे ज़ुल्म करें तब भी मां बाप को राज़ी रखना जरूरी है क्योंकि उन्होंने ही तुम्हें इस दुनिया में लाया है पाल पोस कर बड़ा किया है I दारमी शरीफ की हदीस है किसी के साथ भलाई करके अहसान जताने वाले, मां-बाप की बात ना मानने वाले और हमेशा शराब पीने वाले जन्नत में नहीं जा सकते I

हजरत आबू हुरैरा फरमाते हैं कि रसूल अल्लाह ने फरमाया जो अपने मां बाप को सताए वो शख्स मलऊन हैहजरत अब्दुल्लाह बिन औफ़ा फरमाते हैं, एक आदमी आया कहने लगा या रसूल अल्लाह एक जवान मरने के करीब है उसे कलमा पढ़ने की ताकीद दी जाती है, लेकिन उसकी जबान नहीं चल रही है I आपने पूछा क्या वह पहले कलमा पड़ता था, आदमी बोला हाँ पढ़ता था, आपने फरमाया जब जिंदगी में पढ़ता था तो मौत के बाद कौन रोक रहा है? इतना कहते ही आप उसके घर की तरफ चल पड़े सहाबा भी साथ हो लिए वहां पहुंचकर आपने मरने वाले जवान से फरमाया पढ़ो "ला इलाहा इलल्लाह" जवान बोला सरकार ज़बान नहीं चल रही, आपने पूछा तुम्हारी मां है,वह बोला हाँ है, इतने में उसकी मां अंदर से आई आपने फरमाया ! क्या तुम यह पसंद करोगी कि तुम्हारे लड़के को जलती हुई आग में डाल दिया जाए I माँ बोली नहीं मुझे यह गवारा नहीं कि मेरा बेटा आग में जलाया जाएI आपने फ़रमाया तेरा बेटा ना फरमान तु इससे नाराज़ है तेरी नाराज़गी की वजह से इसे मौत के वक्त कलमा पढ़ने की तौफीक नहीं मिल रही है,अगर तूने इसे माफ नहीं किया तो यह यूं ही मर जायेगा और इसे जहन्नम की आग में जलाया जाएगा क्या तुझे मंजूर है? मां की ममता को जोश आया वह बोली, मैंने इसकी ख़ताये माफ की इतना कहना था कि लड़का कलमा शरीफ पढ़ने लग गया I

मुसलमानों! इस हदीस से पता चलता है कि अगर हमारे माँ बाप हमसे नाराज है तो हमारी सारी इबादत बेकार होगी और मरते वक्त कलमा पढ़ने की तौफीक भी नहीं मिलेगी I

एक वाकया (किस्सा) और सुनिए ताकि अच्छी तरह मालूम हो जाए कि मां-बाप की नाफरमानी करके कितना बड़ा गुनाह और अज़ाब मोल ले रहे हो I अस्बहानी कहते हैं कि मैं एक जगह मेहमान था, मेहमान के घर पास ही कब्रस्तान था अस्त्र के बाद मैंने देखा कि एक कब्र फटी उसमें से एक आदमी निकला जिसका सर तो गधे का और बदन आदमी जैसा था, वह तीन बार गधे की तरह जोर जोर से चिल्लाया और वापिस कब्र के अंदर चला गयाI मैंने लोगों से उसके बारे में पूछा तो बताया कि वह एक शराबी था, उसकी माँ उसे मना करती उसे डांटती लेकिन वह मानता ही नहीं था बल्कि उल्टा उसको बुरा भला कह देता एक दिन उसकी माँ जब उसे मना करने लगी तो उसने उसकी माँ को कहा खामोश रहो क्या गधे की तरह चिल्लाती हो, मां बेचारी खामोश हो गई खैर एक दिन वह अस्र के वक्त मर गया और दफना दिया गया उसी दिन से हर रोज अस्र के वक़्त यह कब्र फटती है और वह निकलता है और गधे की तरह चिल्ला कर चला जाता है, यह नतीजा हैं उसके उस जवाब का जो उसने उसकी मां को दिया था I

भाइयों तो पता चला की माँ बाप की नाफरमानी और शराब पीने वालों को बुरी तरह अंजाम दिया जायेगा जो लोग किसी वजह से अपने माँ बाप को तकलीफ पहुंचा रहे हैं उन्हें सोचना चाहिए कि उनका क्या होगा और माँ बाप अगर नाराज़ हैं तो उन्हें कोई नहीं बचा सकता I माँ बाप अगर नाराज़ हैं तो अल्लाह रसूल भी नाराज़ और जिससे अल्लाह रसूल नाराज़ उसको तबाही और अज़ाब से कोई नहीं बचा सकता I

आजकल देखा जाता हैं की कुछ लोग अपने माँ बाप को छोड़कर अलग से आलिशान घर बना लेते हैं, और अपनी बीवी बच्चो के साथ रहते हैं ताकि उनके ऊपर कोई ज़िम्मेदारी न आये जैसे माँ बाप के आख़री वक़्त में लगने वाले इलाज के पैसे उनकी दवाइयों का खर्चा, तरह तरह की बीमारियों के इलाज के पैसे वगैरह वह खुद लाखो रूपए कमाते है लेकिन माँ बाप को कुछ हज़ार रूपए देने में झिझकते हैं और बहाना बनाते हैंI बीवी बच्चो के लिए तरह तरह की चीज़े ले आते हैं लेकिन माँ बाप के लिए लाने सोचते हैं ऐसे लोगो का आख़िरत में क्या हाल होगा अगर उन्हें बता दिया जाये तो उनकी रूहे डर से काँप उठे I उन्हें पहले यह सोचना चाहिए की हम आज इस मुकाम पर कैसे पहुंचे हैं इसके पीछे किसका हाथ हैं जिस माँ ने कितना दर्द सह कर उन्हें पैदा किया और बड़ा किया जिस बाप ने कैसे खून पसीने की कमाई से उनकी पढाई लिखाई की और कामयाबी के मुकाम तक पहुँचाया I

बहरहाल सब दुआ करो की खुदा हमें माँ बाप की फरमाबरदारी और उनकी खिदमत की तौफीक बक्शे और हमे जहन्नम के अज़ाब से बचाये I
आमीन 

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